× Home Blogs Category About Us Privacy Policy Disclaimer Our services Terms & Conditions Social Media Link Our Other Websites
☰
Logo
अभी डाउनलोड करने हेतु क्लिक करें।
हमारे ऐप्स
s

संयोग श्रृंगार और वियोग श्रृंगार क्या होते हैं?

By: RF competition   Copy    Share
 (432)          30790

श्रृंगार रस

नायक और नायिका के सौन्दर्य तथा प्रेम सम्बन्धी परिपक्व अवस्था फो श्रृंगार रस कहते हैं। श्रृंगार रस का स्थायी भाव रति है। एक अन्य परिभाषा के अनुसार, "सहृदय के हृदय में स्थित रति नामक स्थायी भाव का जब विभाव, अनुभाव और संचारी भाव से संयोग होता है तब श्रृंगार रस की निष्पत्ति होती है। इस रस को 'रसराज' कहा जाता है।

श्रृंगार रस के भेद

श्रृंगार रस के दो भेद होते हैं–
1. संयोग श्रृंगार रस
2. वियोग श्रृंगार रस।

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. पूर्ण विराम का प्रयोग कहाँ होता है || निर्देशक एवं अवतरण चिह्न के उपयोग
2. शब्द शक्ति- अभिधा शब्द शक्ति, लक्षणा शब्द शक्ति एवं व्यंजना शब्द शक्ति
3. रस क्या है? || रस के स्थायी भाव || शान्त एवं वात्सल्य रस
4. रस के चार अवयव (अंग) – स्थायीभाव, संचारी भाव, विभाव और अनुभाव
5. छंद में मात्राओं की गणना कैसे करते हैं?

संयोग श्रृंगार रस

जहाँ नायक और नायिका के संयोग की स्थिति का वर्णन होता है, वहाँ संयोग श्रृंगार रस होता है।

उदाहरण– 1. दुलह श्रीरघुनाथ बने, दुलही सिय सुन्दर मन्दिर माही।
गावति गीत सखै मिलि सुन्दरी, बेद गुवा जुरि विप्र पढ़ाही।
राम को रूप निहारति जानकी, कंकन के नग की परछाही।
यतै सबै सुधि भूलि गई, कर टेकि रही पल टारत नाहीं।
उपरोक्त उदाहरण में,
स्थायी भाव– रति
आश्रय– जानकी
विषय– श्री राम
उद्दीपन– कंगन के नग में प्रिय का प्रतिबिम्ब
अनुभाव– कर टेकना, पलक न गिरना
संचारी भाव– हर्ष, जड़ता, उन्माद।

2. एक पल मेरे प्रिया के दृग पलक
थे उठे ऊपर सहज नीचे गिरे
चपलता के इस विकंपित पुलक से
दृढ़ किया मानो प्रणय संबंध था।
उपर्युक्त उदाहरण में,
स्थायी भाव– रति
आलम्बन– धरातल
उद्दीपन– निशा, सेज
अनुभाव– बैठना, संकुचित होना, मान करना, स्मरण करना
संचारी भाव– हृदय में हलचल, चपलता।

3. देखि रूप लोचन ललचाने
हरषे जनु निज निधि पहचाने
अधिक सनेह देह भई मोरी
सरद ससिहिं जनु वितवचकोरी।

4. बतरस लालच लाल की मुरली धरी लुकाय।
सौंह करें, भौंहनि हँसे, देन कहे नट जाय।

5. मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई।
जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई।

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. मध्यप्रदेश की प्रमुख बोलियाँ एवं साहित्य- पत्र-पत्रिकाएँ
2. छंद किसे कहते हैं? || मात्रिक - छप्पय एवं वार्णिक छंद - कवित्त, सवैया
3. काव्य गुण - ओज-गुण, प्रसाद-गुण, माधुर्य-गुण
4. अलंकार – ब्याज-स्तुति, ब्याज-निन्दा, विशेषोक्ति, पुनरुक्ति प्रकाश, मानवीकरण, यमक, श्लेष
5. रसों का वर्णन - वीर, भयानक, अद्भुत, शांत, करुण

वियोग श्रृंगार रस

जिस रचना में नायक और नायिका के विरह का वर्णन हो वहाँ वियोग श्रृंगार रस होता है।

उदाहरण– 1. उनका यह कुंज-कुटीर नहीं झड़ता उड़ अंशु-अबीर जहाँ
अलि, कोकिल, कीर, शिखी सब हैं सुन चातक की रट पीव कहाँ?
अब भी सब साज-समाज वही तब भी सब आज अनाथ यहाँ
सखि जा पहुँचे सुध-संग कहीं यह अंध सुगंध समीर वहाँ।
उपर्युक्त उदाहरण में,
स्थायी भाव– रति
आश्रय– यशोधरा
विषय– सिद्धार्थ
उद्दीपन– कुंज-कुटीर, कोकिल, भौरों और पपीहे की ध्वनियाँ
अनुभाव– सखी से विषाद भरे स्वर में कथन
संचारी भाव– स्मृति, मोह, विषाद।

2. आँखों में प्रियमूर्ति थी, भूले थे सब भोग।
हुआ योग से भी अधिक, उनका विषम वियोग।

3. ललन चलन सुधि पलन में, आय गयो बहुवीर।
अध खण्डित बीरी रही, पीरी परी शरीर।

4. अँखियाँ हरि दरसन की भूखी।
कैसे रहें रूप रस राँची ए बतियाँ सुनि रूखीं।

हिन्दी के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।
1. बीती विभावरी जाग री― जयशंकर प्रसाद
2. मैया मैं नाहीं दधि खायो― सूरदास
3. मैया कबहिं बढ़ैगी चोटी― सूरदास
4. बानी जगरानी की उदारता बखानी जाइ― केशवदास
5. मैया, मोहिं दाऊ बहुत खिझायो― सूरदास

आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope, the above information will be useful and important.)
Thank you.
R.F. Tembhre
(Teacher)
EduFavour.Com

अभी डाउनलोड करने हेतु क्लिक करें।
💬 टिप्पणियाँ (Comments) 0
अभी कोई कमेंट नहीं है!

पहला कमेंट आप करें और इस पोस्ट को बेहतर बनाएं। 🌟

📝 अपनी राय दें (Post Your Comment)

🧮 5 + 9 = ?
🔒 सुरक्षा कोड सत्यापित करें

📂 श्रेणियाँ