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समास के प्रकार | समास और संधि में अन्तर | What is Samas in Hindi

By: RF competition   Copy    Share
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समास क्या है?

"दो या दो से अधिक शब्दों के योग से जब नया शब्द बन जाता है तब उसे सामासिक शब्द और उन शब्दों के योग को समास कहते हैं।"
जिन मूलशब्दों के योग से समास बना है उनमें से पहले पद को पूर्व पद तथा दूसरे पद को उत्तर पद कहते हैं।
उदाहरण– 'कार्यकुशल' शब्द कार्य और कुशल दो शब्दों के योग से बना है। इसमें 'कार्य' पूर्वपद 'कुशल' उत्तरपद तथा 'कार्यकुशल' सामासिक शब्द है।

निम्न अनुच्छेद को पढिए–
वह प्रतिदिन विद्यालय जाता है। जहाँ वह कभी-कभी कार्यदक्ष शिक्षकों के देश-सेवा और समाजोद्धार की बातें सुनता है। वहीं दोपहर में अवकाश मिलने पर चिन्तामुक्त होकर सहपाठियों के साथ खेलता है।
उपर्युक्त रेखांकित शब्दों का विश्लेषण निम्नानुसार किया जा सकता है–
प्रथम पद – उत्तर पद – समस्त पद – अर्थ
प्रति ...... दिन ........ प्रतिदिन .... दिन-दिन
कार्य ..... दक्ष ......... कार्यदक्ष ... कार्य में दक्ष
देश ...... सेवा...........देश सेवा....देश की सेवा
दो ........ पहर .... दोपहर ... दो पहरों का समाहार
चिंता ..... मुक्त ..... मुक्तचिंता ......चिंता से मुक्त

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6. व्यंजनों का वर्गीकरण
7. अंग्रेजी वर्णमाला की सूक्ष्म जानकारी

महत्वपूर्ण तथ्य–
1. समास में कम से कम दो शब्दों या पदों का योग होता है।
2. मिलने वाले पर्दो की विभक्ति प्रत्यय का लोप हो जाता है।
3. संस्कृत तत्सम के होने पर समास में संधि भी हो सकती है।
(यथा– शीतोष्ण = शीत+उष्ण (यहाँ अ+उ = ओ हो गया है, अतः यहाँ सन्धि भी हैं)
4. समास सजातीय शब्दों का होता है। जैसे- धर्मशाला परन्तु मजहब शाला नहीं होगा। इसमें बहुत से अपवाद भी है, जैसे बम-वर्षा, रेलगाड़ी, स्टेशन-अधीक्षक, जिलाधीश, रसोईखाना आदि।
5. समास का विग्रह होता है। सामासिक शब्दों में मिले हुए शब्दों को पृथक करने की प्रक्रिया समास विग्रह कहलाता है।

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
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6. विराम चिह्न और उनके उपयोग
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सन्धि और समास में अन्तर–

सन्धि–
1. सन्धि में दो वर्णों का योग होता है।
2. सन्धि में दो वर्णों के मेल और विकार की संभावना रहती है।
3. सन्धि को तोड़ना विच्छेद कहलाता है।
समास–
1. समास में दो पदों का योग होता है।
2. समास में पदों शब्दों के प्रत्यय का लोप हो जाता है।
3. समास को तोड़ना विग्रह कहलाता है।

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
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5. एकार्थक शब्द किसे कहते हैं ? इनकी सूची
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7. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (समग्र शब्द) क्या है उदाहरण
8. पर्यायवाची शब्द सूक्ष्म अन्तर एवं सूची
9. शब्द– तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी, रुढ़, यौगिक, योगरूढ़, अनेकार्थी, शब्द समूह के लिए एक शब्द
10. हिन्दी शब्द- पूर्ण पुनरुक्त शब्द, अपूर्ण पुनरुक्त शब्द, प्रतिध्वन्यात्मक शब्द, भिन्नार्थक शब्द

समास के प्रकार–
1. अव्ययी भाव समास –

"जिन सामासिक शब्दों में प्रथमपद प्रधान और अव्यय होता है, उत्तर पद संज्ञा, विशेषण या क्रिया विशेषण होता है, वहाँ अव्ययी भाव समास होता है। समस्त पद में अव्यय के अर्थ की प्रधानता रहती है।"
उदाहरण-
1. समास – यथाशक्ति
प्रथम पद – यथा (अव्यय)
द्वितीय पद – शक्ति (विशेषण)
विग्रह – शक्ति के अनुसार
2. समास – प्रतिदिन
प्रथम पद – प्रति (अव्यय)
द्वितीय पद – दिन (संज्ञा)
विग्रह – प्रत्येक दिन
3. समास – भरपेट
प्रथम पद – भर (अव्यय)
द्वितीय पद – पेट (संज्ञा)
विग्रह – पेट भर के
4. समास – भरसक
प्रथम पद – भर (अव्यय)
द्वितीय पद – सक (क्रिया)
विग्रह – शक्ति भर
5. समास – प्रत्येक
प्रथम पद – प्रति (अव्यय)
द्वितीय पद – एक (विशेषण)
विग्रह – एक एक
अन्य उदाहरण–
यथा विधि – विधि के अनुसार,
यथार्थ – अर्थ के अनुसार
आजन्म – जन्म पर्यन्त
यथारुचि – रुचि के अनुसार

हिन्दी व्याकरण के इन 👇 प्रकरणों को भी पढ़िए।।
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7. 'र' के विभिन्न रूप- रकार, ऋकार, रेफ
8. सर्वनाम और उसके प्रकार

2. तत्पुरुष समास –

जिस समास में उत्तर पद प्रधान हो, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। इसमें कर्ताकारक और सम्बोधन को छोड़कर सभी कारकों में विभक्तियाँ लगाकर समास विग्रह किया जाता है।
यथा– सुखप्राप्त - सुख को प्राप्त, ईश्वर प्रदत्त ईश्वर द्वारा प्रदत्त।

तत्पुरुष समास के भेद–

तत्पुरुष समास के निम्म्रलखित भेद है–
(क) कर्म तत्पुरुष – जहाँ पूर्वपद से कर्म कारक की विभक्ति का लोप होता है, वहाँ कर्म तत्पुरुष होता है।
यथा – (i) सुखप्राप्त - सुख को प्राप्त करने वाला
(ii) माखनचोर - माखन को चुराने वाला
(iii) गिरहकट - गिरह को काटने वाला
(iv) गगन चुम्बी - गगन को चूमने वाला
(v) स्वर्ग प्राप्त - स्वर्ग को प्राप्त
(vi) चिड़ीमार चिड़ियों को मारने वाला
(vii) तिलचट्टा तेल को चाटने वाला
(viii) गृहागत - गृह को आगत (आया हुआ)

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1. मित्र को पत्र कैसे लिखें?
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4. माताजी को पत्र कैसे लिखें? पत्र का प्रारूप
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(ख) करण तत्पुरुष – यहाँ पूर्वपद से करण कारक की विभक्ति का लोप हो, वहाँ करण तत्पुरुष होता है।
यथा- (i) अकाल पीड़ित – अकाल से पीड़ित
(ii) ईश्वर प्रदत्त – ईश्वर द्वारा प्रदत्त
(iii) तुलसीकृत – तुलसी द्वारा कृत
(iv) दयार्द्र – दया से आर्द्र
(v) मदमस्त – मद से मस्त
(vi) मनगढ़त – मन से गढ़ा हुआ
(vii) मनमाना – मन से माना
(viii) रेखांकित – रेखा से अंकित

(ग) सम्प्रदान तत्पुरुष – जहाँ समास के पूर्वपद से सम्प्रदान की विभक्ति 'के लिए' का लोप होता है, वहाँ सम्प्रदान तत्पुरुष होता है।
जैसे – (i) गुरु दक्षिणा – गुरु के लिए दक्षिणा
(ii) गौशाला – गौ के लिए शाला
(iii) देशभक्ति – देश के लिए भक्ति
(iv) रसोईघर – रसोई के लिए घर
(v) राहखर्च – राह के लिए खर्च
(vi) सत्याग्रह – सत्य के लिए आग्रह

(घ) अपादान तत्पुरुष - जहाँ समास के पूर्व पद की अपादान की विभक्ति 'से' (विलग होने के भाव) का लोप हो, वहाँ अपादान तत्पुरुष होता है।
जैसे – (i) ऋणमुक्त – ऋण से मुक्त
(ii) धनहीन – धन से होना
(iii) जन्मांध – जन्म से अंधा
(iv) पथभ्रष्ट – पथ से भ्रष्ट
(v) पदच्युत – पद से च्युत
(vi) भयभीत – भय से भीत

(ङ) सम्बन्ध तत्पुरुष – जहाँ समास के पूर्व पद में संबंध तत्पुरुष की विभक्ति- 'का, के, की' का लोप हो तत्पुरुष समास होता है।
जैसे– (i) अमृतधारा – अमृत की धारा
(ii) आज्ञानुसार – आज्ञा के अनुसार
(iii) गंगातट – गंगा के तट
(iv) मृत्युदण्ड – मृत्यु का दण्ड
(v) राजमाता – राजा की माता
(vi) सचिवालय – सचिव का आलय

(च) अधिकरण तत्पुरुष – जहाँ अधिकरण कारक की विभक्ति- 'में, पर', का लोप होता है, वहाँ अधिकरण तत्पुरुष समास होता है।
जैसे – (i) आपबीती – आप पर बीती
(ii) कार्यकुशल – कार्य में कुशल
(iii) गृहप्रवेश – गृह में प्रवेश
(iv) देशाटन – देश में अटन
(v) लोकप्रिय – लोक में प्रिय
(vi) शरणागत – शरण में आगत

इन प्रकरणों 👇 को भी पढ़ें।
1. हिंदी गद्य साहित्य की विधाएँ
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4. काव्य के प्रकार
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3. कर्मधारय समास–

कर्मधारय का प्रथम पद विशेषण और दूसरा विशेष्य होता है। (विशेषण- विशेष्य (संज्ञा) कर्मधारय)
जैसे– (i) महाकवि – महान है जो कवि
(ii) नराधम - अधम है नर जो
(iii) नीलकमल – नीला है कमल जो
(iv) सदधर्म – सत् है धर्म जो
(v) क्रोधाग्रि - क्रोध रूपी अग्नि
(vi) सत्याग्रह – सत्य के लिए आग्रह
(vii) वचनमृतरूपी – अमृत रूपी अमृत
(viii) महाराजा – महान है जो राजा
(ix) बैलगाड़ी – बैलों से खींची जाने वाली गाड़ी
(x) कापुरुष – कायर है जो पुरुष
(xi) वनमानुष – वन में रहने वाला मनुष्य
(xii) देहलता – देह रूपी लता
(xiii) मृगलोचन – मृग के समान लोचन
(xiv) स्त्रीरत्न – स्त्री रूपी रत्न
(xv) पीताम्बर – पीत है अम्बर जो

4. द्विगु समास –

जिस समास का प्रथम पद संख्यावाचक और अन्तिम पद संज्ञा हो, उसे द्विगु समास कहते हैं।
जैसे– (i) दोपहर - दो पहरों का समाहार
(ii) त्रियुगी – तीनों युगों का समाहार
(iii) चौराहा – चार राहों का समाहार
(iv) पंचवटी - पाँच वटों का समाहार
(v) अठन्नी – आठ आनों का समाहार
(vi) षट्कोण – छ: कोणों का समाहार
(vii) सप्तर्षि – सात ऋषियों का समाहार
(viii) नवग्रह – नव ग्रहों का समाहार

इन प्रकरणों 👇 के बारे में भी जानें।
1. प्राथमिक शाला के विद्यार्थियों हेतु 'गाय' का निबंध लेखन
2. निबंध- मेरी पाठशाला

आशा है, उपरोक्त जानकारी परीक्षार्थियों / विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं परीक्षापयोगी होगी।
धन्यवाद।
R F Temre
rfcompetition.com

आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope, the above information will be useful and important.)
Thank you.
R.F. Tembhre
(Teacher)
EduFavour.Com

Watch video for related information
(संबंधित जानकारी के लिए नीचे दिये गए विडियो को देखें.)
Comments 1
Abhay solanki
21 Aug 2021, 09:09 AM
Hy

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