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हड़प्पा (सिन्धु) सभ्यता के लोगों का धर्म, देवी-देवता एवं पूजा-पाठ

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हड़प्पाई लोगों का धार्मिक दृष्टिकोण

हड़प्पा सभ्यता (सिन्धु सभ्यता) के लोगों के धार्मिक दृष्टिकोण का आधार इहलौकिक और व्यावहारिक था। ये लोग ईश्वर की पूजा मानव, वृक्ष एवं पशु तीनों रूपों में करते थे। ये लोग मूर्ति पूजा करते थे। भारतवर्ष में मूर्ति पूजा का आरम्भ सिन्धु सभ्यता के काल से हुआ है।

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देवी और देवताओं की पूजा

सिन्धु सभ्यता के लोग निम्नलिखित देवियों एवं देवताओं की पूजा करते थे–
1. मातृदेवी– हड़प्पा सभ्यता से एक मृण्मूर्ति प्राप्त हुई है। इस मूर्ति के गर्भ से एक पौधा निकला हुआ है। सम्भवतः यह मूर्ति उर्वरता की देवी का प्रतीक हुआ करती थी।
2. रुद्र देवता– हड़प्पा काल में लोग पशुपति नाथ अर्थात् रुद्र देवता की उपासना करते थे।
3. वनस्पतियों एवं प्राणियों की पूजा– सिन्धु सभ्यता के लोग वृक्ष, पशु, साँप, पक्षी आदि की पूजा करते थे। हड़प्पाई लोग इन वनस्पतियों एवं प्राणियों को प्रकृति का वरदान मानते थे।
4. सूर्य पूजा– मोहनजोदड़ो से एक विशाल स्नानागार प्राप्त हुआ है। इस स्नानागार का प्रयोग सम्भवतः धार्मिक अनुष्ठान तथा सूर्य पूजा में किया जाता था। सिन्धु सभ्यता के स्थल कालीबंगा से अग्निकुण्ड के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। इससे अनुमान लगाया गया है कि अग्नि तथा स्वास्तिक की भी पूजा की जाती थी। स्वास्तिक तथा चक्र सूर्य पूजा के प्रतीक थे।

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हड़प्पाई लोगों के अन्ध विश्वास

सिन्धु सभ्यता के लोग भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र आदि में विश्वास करते थे। इस सभ्यता के कई स्थलों से ताबीज प्राप्त हुए हैं। इस आधार पर, हड़प्पाई लोगों का जादू-टोने पर विश्वास होने का अनुमान लगाया गया है। सिन्धु सभ्यता के स्थल चन्हूदड़ो से कुछ मुहरें प्राप्त हुई हैं। इन मुहरों पर बलि प्रथा के दृश्य अंकित हैं। इससे इस सभ्यता में बलि प्रथा के होने का अनुमान लगाया गया है।

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दाह संस्कार के तरीके

सिन्धु सभ्यता के लोग पुनर्जन्म में विश्वास करते थे। मृत्यु के पश्चात् दाह संस्कार के तीन तरीके प्रचलित थे। ये तरीके निम्नलिखित हैं–
1. पूर्ण शवाधान
2. आंशिक शवाधान
3. कलश शवाधान।

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5. सिन्धु सभ्यता के प्रमुख स्थल– राखीगढ़ी, कालीबंगा, बनावली, धौलावीरा

आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope, the above information will be useful and important.)
Thank you.
R.F. Tembhre
(Teacher)
EduFavour.Com

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