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निहारिका (आकाशगंगा) किसे कहते हैं? | हमारी निहारिका 'मन्दाकिनी'

By: RF competition   Copy       Share
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निहारिका (आकाशगंगा)

आसमान में हमें अनेक तारे दिखाई देते हैं। तारे एक विशाल समूह के रूप में रहते हैं। इस समूह को 'निहारिका' कहा जाता है। एक निहारिका में कई हजार करोड़ तारे होते हैं। सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में अरबों निहारिकाएँ उपस्थित हैं। ये निहारिकाएँ प्रकाश के नदी के समान दिखाई देती हैं, इसलिए इन्हें 'आकाशगंगा' भी कहा जाता है। आकाशगंगाओं के 'प्रतिसरण नियम' का प्रतिपादन 'एडविन हब्बल' ने किया था।

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निहारिका की उत्पत्ति

प्रारम्भ में ब्रह्माण्ड में कुछ नहीं था। चारों ओर शून्य था। केवल कुछ गैसें और धूल के कण उपस्थित थे। इन गैसों में हाइड्रोजन गैस प्रमुख थी। धीरे-धीरे हाइड्रोजन गैस समूहों के रूप में जमा होने लगी और बादलों का रूप लेने लगी। धीरे-धीरे ये बादल विस्तृत होने लगे और इनका संचयन होने लगा। इसके बाद इन बादलों ने गैसों के झुण्डों का रूप ले लिया। ये गैसों के झुण्ड बढ़ने लगे और गैसों के संचयन से तारों का निर्माण हुआ। अनगिनत तारे एक समूह के रूप में निर्मित हुए। यह समूह निहारिका के रूप में विकसित हुआ। निहारिका के सभी तारे गुरुत्वाकर्षण बल के अधीन होते हैं, इसीलिए एक निहारिका के रूप में बँधे रहते हैं।

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निहारिका से उत्सर्जित विकिरणें

निहारिका से विभिन्न प्रकार की विकिरणें उत्सर्जित होती हैं। ये विकिरणें निम्नलिखित हैं–
1. अवरक्त किरणें
2. गामा किरणें
3. रेडियो तरंगे
4. X-किरणें
5. दृश्य प्रकाश
6. पराबैगनी तरंगें आदि।

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हमारी निहारिका 'मन्दाकिनी'

हमारा सौरमण्डल जिस निहारिका में स्थित है, उसे मन्दाकिनी कहा जाता है। मन्दाकिनी का आकार सर्पिलाकार है। इसे सर्वप्रथम वैज्ञानिक 'गैलीलियो' ने देखा था। हमारी मन्दाकिनी ब्रह्माण्ड की अनेक आकाशगंगाओं में से एक है। यह कई आकाशगंगाओं के वृहद् समूह का एक सदस्य है, जिसे 'स्थानीय समूह' कहा जाता है। मन्दाकिनी के सर्वाधिक निकट स्थित आकाशगंगा का नाम 'एण्ड्रोमिडा' है। यह हमारे सौरमंडल से लगभग 22 लाख प्रकाश वर्ष दूर है।

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मन्दाकिनी की भुजाएँ एवं केन्द्र

मंदाकिनी की तीन भुजाएँ एवं एक केन्द्र है। केन्द्र को 'बल्ज' कहते हैं। इसमें 'ब्लैक होल' पाया जाता है। गुरुत्वाकर्षण के कारण यहाँ तारों का सर्वाधिक संकेन्द्रण होता है। मंदाकिनी की मध्यवर्ती भुजा को घूर्णनशील भुजा कहा जाता है। इसमें हमारा सौरमण्डल स्थित है। मन्दाकिनी की तीसरी भुजा में नए तारों का जन्म होता है। 'ओरियन नेबुला' मन्दाकिनी के सबसे शीतल और चमकीले तारों का क्षेत्र है। मंदाकिनी का वह क्षेत्र जो पृथ्वी से प्रकाश की नदी के समान दिखाई देता है, उसे 'स्वर्ग की गंगा' या 'मिल्की वे' कहा जाता है।

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आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope, the above information will be useful and important.)
Thank you.
R.F. Tembhre
(Teacher)
EduFavour.Com

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