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लोक प्रशासन में सांवेगिक बुद्धि की महत्ता: सफल प्रशासक के लिए एक अनिवार्य गुण

By: RF Tembhre   Copy       Share
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लोक प्रशासन में सांवेगिक (भावात्मक) बुद्धि की उपयोगिता

लोक प्रशासन में सांवेगिक बुद्धि की उपयोगिता को समझने के लिए हमें यह जानना आवश्यक है कि प्रशासन में कार्य करते समय प्रशासकों को न केवल तार्किक और विश्लेषणात्मक सोच की आवश्यकता होती है, बल्कि भावनाओं का प्रभावी प्रबंधन भी करना पड़ता है। भावनात्मक या सांवेगिक बुद्धि का आशय है- स्वयं की तथा दूसरों की भावनाओं को पहचानने, समझने और प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने की क्षमता।

1. चुनौतियों और दबावों के बीच संतुलन बनाना
आज के समय में लोक प्रशासन में कार्यरत अधिकारियों को अनेक प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे सीमित संसाधनों के बीच कार्य करना, जनता की बढ़ती अपेक्षाएँ, सामाजिक असमानता, राजनीतिक हस्तक्षेप, मीडिया की निगरानी, प्राकृतिक आपदाएँ आदि। इन दबावों के बीच संतुलन बनाए रखना और सकारात्मक निर्णय लेना तभी संभव है जब प्रशासक के पास उच्च सांवेगिक बुद्धि हो।

2. टीम प्रबंधन और सहकर्मियों के साथ समन्वय
सरकारी प्रयासों की सफलता सामूहिक प्रयास पर आधारित होती है। एक अधिकारी जो सहकर्मियों और अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ बेहतर तालमेल बना पाता है, वह अपेक्षित परिणामों को शीघ्र प्राप्त कर सकता है। सांवेगिक बुद्धि से युक्त अधिकारी संवाद कौशल, सहानुभूति और प्रेरणा देने की कला में दक्ष होते हैं, जिससे कार्यस्थल पर सहयोग और समर्पण का वातावरण बनता है।

3. विपरीत परिस्थितियों में कार्य प्रेरणा बनाए रखना
कई बार प्रशासन में कार्य करते हुए असफलताएँ, आलोचनाएँ और अवसाद जैसी स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं। ऐसे समय में कार्य प्रेरणा बनाए रखना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है। सांवेगिक बुद्धि वाले प्रशासक आत्म-संयम, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ न केवल स्वयं को प्रेरित रखते हैं, बल्कि अपनी टीम को भी प्रेरणा देते हैं।

4. समस्याओं के समाधान में रचनात्मकता और संवेदनशीलता
प्रशासन में कई जटिल और संवेदनशील समस्याएँ आती हैं, जैसे जातीय तनाव, सांप्रदायिक विवाद, गरीबों के पुनर्वास आदि। इन समस्याओं के समाधान के लिए केवल कठोर नियमों का पालन पर्याप्त नहीं होता। एक संवेदनशील प्रशासक लोगों की भावनाओं को समझकर रचनात्मक और स्वीकार्य समाधान निकाल सकता है।

5. विविधता में एकता बनाए रखना
भारत जैसे देश में प्रशासनिक अधिकारियों को विभिन्न जाति, धर्म, भाषा, संस्कृति और समुदाय के लोगों के बीच समन्वय स्थापित करना पड़ता है। यह तभी संभव है जब अधिकारी में सांवेगिक बुद्धि प्रबल हो। सांवेगिक बुद्धि के बल पर अधिकारी भिन्न-भिन्न समूहों की भावनाओं को समझकर समावेशी और संतुलित नीतियाँ बना सकते हैं।

6. उत्तरदायित्व और नेतृत्व कौशल का विकास
एक अच्छे प्रशासक की पहचान यह होती है कि वह सफलता का श्रेय अपनी टीम को देता है और विफलता की जिम्मेदारी स्वयं लेता है। उच्च सांवेगिक बुद्धि वाले अधिकारी अपने नेतृत्व कौशल से अपनी टीम में उत्तरदायित्व की भावना उत्पन्न करते हैं, जिससे पूरी प्रणाली अधिक उत्तरदायी और पारदर्शी बनती है।

7. लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा
लोकतंत्र में प्रशासन का उद्देश्य केवल आदेश देना नहीं होता, बल्कि आर्थिक-सामाजिक न्याय, राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बनाए रखना भी होता है। सांवेगिक बुद्धि से युक्त प्रशासक संवेदनशील मुद्दों को समझते हुए नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हैं और समाज में न्याय, समानता और सौहार्द का वातावरण स्थापित करते हैं।

8. नीति निर्माण और कार्यान्वयन में प्रभावशीलता
जब प्रशासक नीतियाँ बनाते हैं तो उन्हें विभिन्न वर्गों की आवश्यकताओं और भावनाओं का ध्यान रखना पड़ता है। सांवेगिक बुद्धि की सहायता से वे अधिक व्यावहारिक और संवेदनशील नीतियाँ बना सकते हैं, जिससे कार्यान्वयन में कम विरोध और अधिक सहयोग प्राप्त होता है।

निष्कर्ष
लोक प्रशासन में सांवेगिक बुद्धि का होना एक प्रशासक के सफल होने की अनिवार्य शर्त बन गई है। यह न केवल बेहतर कार्य निष्पादन में सहायता करती है, बल्कि समाज में समावेशी विकास, सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आज के जटिल प्रशासनिक परिवेश में भावनात्मक बुद्धि को विकसित करना प्रत्येक प्रशासक के लिए अत्यंत आवश्यक हो गया है।

आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope, the above information will be useful and important.)
Thank you.
R.F. Tembhre
(Teacher)
EduFavour.Com

Comments 1
Nandani 27 Jul 2021, 07:33 AM
RanbiR Singh

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