Learn Today
Succeed
Tomorrow
सामान्य रूप से हम कहें तो भाषा हमारे मुँह से कहे जाने वाले शब्द और वाक्यों का समूह है। भाषा मानव का अपने विचारों की अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है जो मानव के आरंभ से अंत तक उसका साथ निभाते हुए जीवन के समस्त क्षेत्रों से अवगत कराने का कार्य करती है।
'भाष' धातु से भाषा शब्द बना है जिसका अर्थ है बोलना। जीवन का कोई भी पल ऐसा नहीं है जब हम भाषाहीन रूप से जी पाते हों चाहे हम अकेले हों या किसी के साथ। हम दूसरों के साथ बात करने के अलावा अपने आप से भी बात करते हैं। वास्तव में भाषा मानव से मानव को जोड़ने का माध्यम है, एक प्रकार से यह मानवीय संबंधों की निर्धारिका है। यहीं से यह सामाजिक सरोकार की वस्तु बन जाती है। व्यक्ति जन्म से लेकर वर्तमान तक जैसे-जैसे व्यक्ति की सोच, आचार-व्यवहार में परिवर्तन होता गया वैसे-वैसे भाषा में भी परिवर्तन होता जा रहा है। जैसे कि प्राचीन काल में मानव इशारों व संकेतों के आदान-प्रदान से अपने विचार व्यक्त करता था, व्यापक रूप से देखने पर इशारे भी माध्यम भाषा कहलाते हैं।
भाषा के संदर्भ में हमारे भारतीय विद्वानों एवं पाश्चात्य देशों के विद्वानों ने परिभाषाएँ दी हैं जो इस प्रकार हैं-
उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर भाषा के संदर्भ में निम्न तथ्य उभरकर सामने आते हैं-
प्रत्येक परिवार की अपनी बोली होती है, कोई मालवी, कोई बुंदेली, बघेली, पवारी, गोंडी, निमाड़ी बोलने वाले हैं। एक बालक सर्वप्रथम इन्हीं के सम्पर्क में आता है परिणामस्वरूप वह बोली सीखता है जिसे (उस बोली को) हम बालक की मातृभाषा कहते हैं। संक्षेप में कहें तो एक बालक द्वारा अन्य के बजाय अपनी माँ से सीखी गई भाषा या बोली बच्चे की मातृभाषा कहलाती है।
भाषा एवं मातृभाषा क्या है यह जान लेने के पश्चात् मूल बात यह आती है कि बच्चों को भाषा का ज्ञान कैसे कराया जाये। एक शिक्षक क्या करे जिससे बच्चों में भाषा का ज्ञान हो जाये। विद्यालय में जब बालक अपने घरों से आते हैं तब केवल वे अपनी मातृभाषा का ज्ञान या जानकारी ज्यादा रखते हैं। हमारे सामने प्रश्न रहता है कि उन बालकों को हम मानक भाषा का ज्ञान कैसे करायें। क्योंकि मानक भाषा जो किसी राज्य या देश की राजकाज की भाषा होती है जिसमें समस्त जानकारियाँ एवं क्रियाकलाप किये जाते हैं का ज्ञान बच्चों को नहीं होता है या थोड़ी बहुत ही जानकारी वे रख पाते हैं।
भाषा मानव जीवन की एक सामान्य सतत प्रक्रिया है, जिसे मानव को ईश्वर द्वारा दिया गया अमूल्य उपहार कहा जाता है। भाषा का आरंभ मानव के जन्म के साथ ही हो जाता है। विभिन्न कौशल जैसे - बोलना, सुनना, पढ़ना, लिखना, समझना को पूरा करते हुए व्यक्ति भाषा में निपुणता प्राप्त करता है। आरंभ में बालक भूख लगने पर रोता है तो माँ समझ जाती है कि बालक को भूख लगी है। फिर धीरे-धीरे परिवार के सम्पर्क में रहकर, आपसी संवादों को सुनकर बालक उनका अनुकरण करता है और इस तरह वह भाषा के क्षेत्र में पारंगत हो जाता है। इस दृष्टि से हम कह सकते हैं कि भाषा अनुकरण की वस्तु है तथा निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है।
इन सब बातों को दृष्टिगत रखते हुए हमें बालक को किसी विषयगत या जीवन के प्रत्येक क्षेत्र का ज्ञान कराने के लिए सर्वप्रथम कार्य भाषा सिखाना होता है। भाषा सिखाने हेतु हमें कुछ बातें ध्यान में रखनी होंगी-
वैसे तो बालक भाषा का ज्ञान अनुकरण करके ही प्राप्त करते हैं परन्तु प्रत्येक भाषा का ज्ञान अनुकरण करके नहीं सीखा जा सकता है क्योंकि बालक के परिवार में या परिवेश में प्रत्येक भाषा नहीं बोली जाती। प्रायः परिवार में बालक की मातृभाषा बोली जाती है एवं विद्यालय में मानक भाषा जैसे हिन्दी, मराठी, उर्दू या अंग्रेजी कोई एक बोली जाती है ऐसी परिस्थिति में बालक केवल अनुकरण करके उन भाषाओं का ज्ञान प्राप्त कर पाता है जो उसे उसके परिवेश में बोली जाती है।
मध्य प्रदेश के समस्त विद्यालयों में मानक भाषा हिन्दी द्वारा अध्यापन कार्य या आपस के संप्रेषण में किया जाता है। अतः बालक को एक शिक्षक द्वारा हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेजी, उर्दू या संस्कृत का ज्ञान कराना भी आवश्यक होता है। चूंकि बालक प्रारंभ में विद्यालय आता है तो केवल वह अपनी मातृभाषा से परिचित होता है अतः शिक्षक को उसे हिन्दी भाषा का ज्ञान कराना भी आवश्यक है। अतएवं एक शिक्षक भाषा सिखाने के लिए निम्न प्रकार की तकनीकों का उपयोग करता है।
प्राथमिक स्तर की शिक्षा में भाषा का महत्वपूर्ण स्थान होता है। भाषा शिक्षण का माध्यम हिंदी है। भाषायी मूल कौशल अन्य विषयों के सीखने-समझने में सहायक होते हैं। हिन्दी भाषा की प्रमुख मूल दक्षताएं इस प्रकार हैं-
हम प्रायः देखते हैं कि बालक प्रारंभ में अनुकरण करके ही भाषा सीखता है परन्तु मानक भाषा में अपनी मातृभाषा के शब्द मिलाकर बोलता है या पूरा-पूरा वाक्य नहीं बोलता। शिक्षक को छात्र द्वारा बोले गये वाक्यों या शब्दों में सुधार किया जाना आवश्यक है कि धीरे-धीरे बालक भाषा के शब्दों में सुधार करके मानक भाषा बोलना सीख जाता है। उदाहरण के लिए शुरू-शुरु में बालक 'मैं खेलूंगा' को 'मैं खेल' ही बोलता है या 'तुम्हारा क्या नाम है?' को 'तुम्हा का नाम है।' इस तरह बोलता है। शिक्षक इसमें क्रमिक रूप से सुधार करता है। बालक भाषा के शब्दों को भी प्रारम्भ में शुद्ध रूप से नहीं बोल पाता, जैसे 'पेड़' को 'पेर', तेलगर को तेलवाल बोलता है। शिक्षक द्वारा धीरे-धीरे उनमें अभ्यास कराकर सुधार किया जा सकता है।
बालकों को भाषा ज्ञान कराने के आधार हैं वर्ण, शब्द एवं वाक्य। बालक प्राथमिक स्तर पर क्रमशः कक्षाओं में वर्ण या अक्षर, शब्द तथा वाक्यों की रचना के बारे में समझकर सीखता है। बालक जो कुछ भी बोलता है या अपने भाव प्रकट करता है यदि उन्हें लिपिबद्ध करने के लिए उपरोक्त के बारे में समझना होगा।
नाम से ही स्पष्ट है कि भाषा को सीखने के लिए बालक के अन्दर की क्षमता जिससे बालक भाषा को ग्रहण करता है। दूसरे शब्दों में कहें तो बालक की क्षमताएँ जिनके बल पर बालक भाषा को ग्रहण करता है। या किसी बालक को भाषा सिखाने के लिए ऐसे कौन-कौन से साधन हैं जिनके द्वारा बालक आसानी से भाषा को ग्रहण कर सकता है।
एक बालक भाषा को शीघ्रता से ग्रहण कर ले इस हेतु बालक के अन्दर किन-किन खूबियों का होना अनिवार्य है। वे तत्व निम्न हैं-
बालक को सिखाने हेतु उसकी ग्रहणशीलता को बढ़ाना परम आवश्यक है जिसके बगैर बालक का सीखना सम्भव नहीं हो पाता। ये कारक निम्न हो सकते हैं-
वे सभी जो कारक बच्चे को भाषा सीखना को प्रभावित करते हैं वे ही कारक बालक की भाषा ग्रहणशीलता को भी प्रभावित करते हैं।
प्रश्न 1. व्यक्ति के भावों के संप्रेषण का माध्यम नहीं है -
(A) ध्वनि
(B) संकेत
(C) स्पर्श
(D) रंग
प्रश्न 2. "भाषा वह माध्यम है जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचार दूसरों पर भली प्रकार प्रकट कर सकता है और दूसरों के विचार आप स्पष्टतया समझ सकते हैं।" यह परिभाषा है -
(A) कामता प्रसाद गुरु की
(B) बाबूराम सक्सेना की
(C) श्यामसुंदर दास की
(D) इनमें से कोई नहीं
प्रश्न 3. एक बालक के घर में माता-पिता एवं भाई बहिनों द्वारा पवारी बोली बोली जाती है परन्तु विद्यालय में बालक हिन्दी भाषा में अध्ययन करता है उस बालक की मातृभाषा कहलायेगी -
(A) हिन्दी
(B) पंवारी
(C) दोनों
(D) दोनों नहीं
प्रश्न 4. भाषा सीखी जा सकती है -
(A) बोलकर
(B) अनुकरण करके
(C) अभ्यास से
(D) उपरोक्त सभी
प्रश्न 5. बालक की ग्रहणशीलता को प्रभावित करने वाला कारक है -
(A) बालक का भोजन
(B) खेलकूद
(C) बालक के संवेग
(D) उपरोक्त सभी
प्रश्न 6. एक बालक किसी विधि के द्वारा सबसे अधिक भाषा को सीख सकता है -
(A) बोलकर
(B) अनुकरण करके
(C) अभ्यास करके
(D) सभी तरीके से
प्रश्न 7. एक बालक को भाषा सिखाने हेतु आवश्यक तत्व नहीं हैं -
(A) जिज्ञासा
(B) अनुकरण
(C) आदतें
(D) अभ्यास
प्रश्न 8. एक बालक विद्यालय में शिक्षक द्वारा बार-बार प्रयास करने पर भाषा से सम्बन्धित कुछ शब्दों को सीखने का प्रयास करता है परन्तु नहीं सीख पाता जबकि अन्य क्षेत्रों में वह चतुर है। बतायें एक शिक्षक को करना चाहिए -
(A) बालक में जिज्ञासा बढ़ाये
(B) उसे सीखने हेतु समझाये
(C) उसकी तारीफ करे
(D) उपरोक्त में से कोई नहीं
प्रश्न 9. जन्म के पश्चात् बालक भाषा सीखता है -
(A) अभ्यास के द्वारा
(B) अनुकरण करके
(C) जिज्ञासा जागृत करा कर
(D) उपरोक्त सभी प्रकार से
प्रश्न 10. एक बच्चे का पूर्व-भाषा ज्ञान का आकलन शिक्षक द्वारा किया जाना चाहिए क्योंकि -
(A) उसके भाषा स्तर का आकलन करना जरूरी है।
(B) उसकी बौद्धिक क्षमता का आकलन करना जरूरी है।
(C) उसका शैक्षिक स्तर ज्ञात करना आवश्यक है।
(D) उसे उसके भाषा स्तर के आधार पर व्यक्तिगत मार्गदर्शन दिया जा सके।
प्रश्न 11. प्राथमिक स्तर पर बालकों को भाषा सिखाने के लिए शिक्षक को करना चाहिए -
(A) भिन्न भिन्न तरह के खेल सिखाये।
(B) उसे किसी विषय वस्तु को प्रस्तुत करने को कहे।
(C) उसे किसी भी अभिव्यक्ति के लिए प्रोत्साहित करे।
(D) उसे पाठ पढ़ने को कहे।
प्रश्न 12. खेल एवं गतिविधियाँ किसी बालक को भाषा सिखाने का महत्वपूर्ण साधन है क्योंकि -
(A) बच्चे खेलों एवं गतिविधियों में अधिक रुचि लेते हैं।
(B) बच्चों को गतिविधियों द्वारा सिखाने हेतु आदेशित किया गया है।
(C) खेलों व गतिविधियों में विषय-वस्तु दी हुई होती है।
(D) उपरोक्त में से सभी कथन गलत हैं।
प्रश्न 13. शिक्षक को अभिव्यक्ति एवं प्रस्तुतीकरण का तरीका बालक के भाषा विकास को प्रभावित करता है यदि शिक्षक -
(A) कम संज्ञानात्मक योग्यता वाले होते हैं।
(B) खेल व गतिविधियों के द्वारा ही समस्त विषय वस्तु का ज्ञान कराना चाहते हैं।
(C) बालकों के भाषा विकास में खेल व गतिविधियाँ नहीं कराते।
(D) बालकों को नैतिकता के पाठ पढ़ाने में रुचि नहीं रखते।
प्रश्न 14. बालकों के भाषा विकास को प्रभावित करने वाला कारक नहीं है -
(A) बालक का वाणी दोष
(B) माता व पिता की निरक्षरता
(C) बालक की मनोवृत्ति
(D) बालक की बुद्धि लब्धि
प्रश्न 15. कक्षा 5वीं के बालकों को लोकोक्ति एवं मुहावरों का ज्ञान कराया जाता है क्योंकि -
(A) भाषा के मूल आधार हैं।
(B) भाषा में निखार लाते हैं।
(C) व्यावहारिक जीवन में भी इसका प्रयोग होता है।
(D) बालकों में भाषा को श्रेष्ठता का गुण पैदा करता है।
प्रश्न 16. एक बालक के भाषा विकास हेतु निम्न में से कौन सी गतिविधि कक्षा में आवश्यक नहीं है -
(A) नाटक
(B) कहानी
(C) भ्रमण
(D) अन्त्याक्षरी
प्रश्न 17. निम्न में से कौन सा बालकों को भाषा सिखाने का उद्देश्य नहीं है -
(A) साहित्य के प्रति रुचि जागृत करना
(B) अभिव्यक्ति की क्षमता का विकास करना
(C) रचना कौशल का विकास करना
(D) उपरोक्त में से कोई नहीं।
प्रश्न 18. प्राथमिक स्तर पर बालकों को भाषा सिखाने हेतु निम्न कार्य करना चाहिए -
(A) बालकों के साथ मित्रवत् व्यवहार
(B) अपने प्रति बालकों को आकर्षित करना
(C) सांवेगिक रूप से नियंत्रण रखना
(D) उपरोक्त सभी
प्रश्न 19. शिक्षक द्वारा भाषा शिक्षण कराते समय किस बात का ध्यान रखा जाना आवश्यक है -
(A) बच्चों को अधिकाधिक रूप से सक्रिय रखा जाये।
(B) विद्यालय में बाल सभा का आयोजन कराये।
(C) बच्चों को श्याम पट पर लिखने का अवसर दे।
(D) उपरोक्त सभी
प्रश्न 20. एक बालक की भाषा ग्रहणशीलता निर्भर करती है -
(A) बुद्धि लब्धि पर
(B) संवेगों पर
(C) माता पिता के सामाजिक स्तर पर
(D) उपरोक्त सभी पर
प्रश्न 21. एक बालक की ग्रहणशीलता को प्रभावित करने वाला तत्व है -
(A) परिवेश एवं वातावरण
(B) बालक की आयु
(C) बालक की इन्द्रियाँ
(D) उपरोक्त सभी
प्रश्न 22. बालक की भाषा ग्रहणशीलता का विकास किसके द्वारा किया जा सकता है -
(A) प्रत्येक बालक को अभिव्यक्ति का अवसर दे।
(B) बालक को सीखने के लिए प्रोत्साहित करे।
(C) बालकों में रुचि जागृत करे।
(D) उपरोक्त सभी।
प्रश्न 23. भाषा की उत्पत्ति का मूल आधार किसे माना जाता है?
(A) संकेत और ध्वनियाँ
(B) केवल लिखित लिपि
(C) इशारों की अनकही भाषा
(D) केवल सांकेतिक लिपि
प्रश्न 24. पाश्चात्य विद्वान 'स्वीट' के अनुसार भाषा की परिभाषा क्या है?
(A) विचारों की अदृश्य अभिव्यक्ति
(B) ध्वन्यात्मक शब्दों द्वारा विचारों की अभिव्यक्ति
(C) लिखित संकेतों का समूह
(D) सार्थक ध्वनियों का संकलन
प्रश्न 25. बालक के भाषा सीखने की प्रक्रिया में सबसे पहला चरण कौन सा होता है?
(A) लिखना
(B) अनुकरण करना
(C) व्याकरण सीखना
(D) पुस्तक पढ़ना
प्रश्न 26. प्राथमिक स्तर पर भाषा शिक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या होना चाहिए?
(A) कठिन शब्दों को याद करना
(B) व्याकरण के नियमों को रटना
(C) अपनी बात को सुगमता से कह और समझ सकना
(D) केवल परीक्षा में उत्तीर्ण होना
प्रश्न 27. यदि कक्षा में कोई बालक हकलाने या तुतलाने की समस्या से ग्रसित है, तो शिक्षक का क्या कर्तव्य होना चाहिए?
(A) उस बालक का उपहास उड़ाना
(B) उसे कक्षा से बाहर कर देना
(C) उसे प्रोत्साहित करना और अन्य बच्चों के साथ समन्वय बनाना
(D) उस पर ध्यान न देना
प्रश्न 28. भाषा ग्रहणशीलता को बढ़ाने के लिए विद्यालय में इनमें से किस गतिविधि का आयोजन किया जाना चाहिए?
(A) बाल सभा और अंत्याक्षरी
(B) केवल मौन अध्ययन
(C) सजा के रूप में लंबी लिखाई
(D) खेलकूद पर पूर्ण प्रतिबंध
प्रश्न 29. एक शिक्षक के लिए भाषा शिक्षण के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात क्या है?
(A) केवल पाठ्यक्रम पूरा करना
(B) शिक्षण को बाल-केंद्रित रखना और सरल भाषा का प्रयोग करना
(C) अनुशासन के नाम पर बच्चों को डराना
(D) उक्त सभी
प्रश्न 30. बालक के मानसिक विकास और भाषा ग्रहणशीलता पर किसका सीधा प्रभाव पड़ता है?
(A) केवल विद्यालय की दीवारें
(B) बालक का शारीरिक स्वास्थ्य और पोषण
(C) केवल बाहरी दिखावा
(D) उक्त में कोई नहीं।
प्रश्न 1. उत्तर (C)
प्रश्न 2. उत्तर (A)
प्रश्न 3. उत्तर (C)
प्रश्न 4. उत्तर (D)
प्रश्न 5. उत्तर (D)
प्रश्न 6. उत्तर (B)
प्रश्न 7. उत्तर (C)
प्रश्न 8. उत्तर (A)
प्रश्न 9. उत्तर (D)
प्रश्न 10. उत्तर (B)
प्रश्न 11. उत्तर (C)
प्रश्न 12. उत्तर (A)
प्रश्न 13. उत्तर (B)
प्रश्न 14. उत्तर (B)
प्रश्न 15. उत्तर (D)
प्रश्न 16. उत्तर (C)
प्रश्न 17. उत्तर (D)
प्रश्न 18. उत्तर (D)
प्रश्न 19. उत्तर (D)
प्रश्न 20. उत्तर (D)
प्रश्न 21. उत्तर (D)
प्रश्न 22. उत्तर (D)
प्रश्न 23. उत्तर (A)
प्रश्न 24. उत्तर (B)
प्रश्न 25. उत्तर (B)
प्रश्न 26. उत्तर (C)
प्रश्न 27. उत्तर (C)
प्रश्न 28. उत्तर (A)
प्रश्न 29. उत्तर (B)
प्रश्न 30. उत्तर (B)
उपरोक्त जानकारी से संबंधित pdf नीचे स्क्रॉल कर देख सकते हैं। यदि आप डाउनलोड करना चाहें हैं तो Download pdf के हरे बटन पर क्लिक कर डाउनलोड कर सकते हैं।👇
आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope, the above information will be useful and important.)
Thank you.
R.F. Tembhre
(Teacher)
EduFavour.Com
इन 👇 प्रकरणों के बारे में भी जानें।
1. बाल विकास क्या है इसकी अवधारणा एवं परिभाषाएंँ
2. बाल विकास की विशेषताएंँ
3. विकास के अध्ययन की उपयोगिता- बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र
4. बाल विकास के अध्ययन में ध्यान रखे जाने वाली प्रमुख बातें
5. गर्भावस्था एवं माता की देखभाल
6. शैशवावस्था- स्वरूप, महत्वव विशेषताएँ
इन 👇 प्रकरणों के बारे में भी जानें।
1. विकास के स्वरूप
2. वृद्धि और विकास में अंतर
3. बाल विकास या मानव विकास की अवस्थाएँ
4. बाल्यावस्था स्वरूप और विशेषताएँ
5. किशोरावस्था- किशोरावस्था की विशेषताएँ
इन 👇 प्रकरणों के बारे में भी जानें।
1. बहुभाषिकता क्या है
2. संप्रेषण क्या है
3. शिक्षा मनोविज्ञान- प्रकृति और उद्देश्य
4. समाजीकरण का अर्थ
5. POCSO act क्या है
इन 👇 प्रकरणों के बारे में भी जानें।
1. उद्योतन सामग्री क्या होती है
2. किशोरावस्था का स्वरूप
3. प्रौढ़ावस्था एवं वृद्धावस्था काल
4. अधिगम क्या है? अधिगम की परिभाषाएँ एवं विशेषताएँ
5. विकास का अधिगम से संबंध
6. शारीरिक विकास क्या है? विकास की परिभाषा
7. शारीरिक विकास एवं इसे प्रभावित करने वाले कारक
8. गामक विकास - परिभाषाएँ, विशेषताएँ एवं प्रभावित करने वाले कारक
9. मानसिक विकास एवं इसे प्रभावित करने वाले कारक
10. संवेग कौन कौन से है? संवेगात्मक विकास को प्रभावित करने वाले कारक।
इन 👇 प्रकरणों के बारे में भी जानें।
1. भाषा विकास अर्थ, परिभाषा, चरण एवं प्रभावित करने वाले कारक
2. सामाजिक विकास के अभिकरण एवं इसे प्रभावित करने वाले कारक
3. मूल्य परक विकास (नैतिक विकास) क्या है? प्रभावित करने वाले कारक
4. सृजनात्मक विकास क्या है इसका महत्व एवं प्रभावित करने वाले कारक
5. सौंदर्य विकास क्या है? इसके सिद्धांत, सौंदर्य विकास के तत्व एवं प्रभावित करने वाले कारक
6. बहुआयामी बुद्धि (Multi-Dimensional Intelligence) किसे कहते हैं, बहुआयामी बुद्धि सिद्धांत, बहुआयामी बुद्धि से लाभ
7. व्यक्तित्व और उसका मापन - व्यक्तित्व की परिभाषाएं इसके अंग, निर्धारक तत्व, अंतर्मुखी एवं बहिर्मुखी व्यक्तित्व, संतुलित व्यक्तित्व
📌 हाल की पोस्टें
📂 श्रेणियाँ

अभी कोई कमेंट नहीं है!
पहला कमेंट आप करें और इस पोस्ट को बेहतर बनाएं। 🌟
📝 अपनी राय दें (Post Your Comment)